Tuesday, March 14, 2017

About Me

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Friends,
I am a freelance writer,  I write in English language as well se in Hindi. In English, I write Articles on current topics. In Hindi, I write Stories, Satires, and Articles on Current Affairs. In short, this is about me.

In future,  friends may find interesting  Stories, Articles and Satires. In this post you will find an interesting Satires in Hindi
Title - Chamcheria Hua  Please visit and enjoy.


चमचेरिया हुआ
अपने एक मित्र हैं फक्कड नाथ फक्कड, सुबह-सुबह ही हमारे घर पर आ धमके । मित्र होने के कारण उनका यह अधिकार तो बनता ही है कि वह कभी भी किसी भी समय हमारे घर आ धमके ।
आते ही कहने लगे, भ्रमित  जी ,चलिये  डाक्टर विश्वास से मिलने चलते हैं ।
मैंने उत्सुकतावश पूछा, क्या हुआ फक्कड जी, आज सुबह सुबह ही डाक्टर विश्वास की याद कैसे आ गयी ?
कहने लगे, भृमित जी, माना, डाक्टर विश्वास पेशे से आखों के डाक्टर है लेकिन हमारे अच्छे मित्र भी हैं । काफी दिन हो गये, उनसे मुलाकात भी नहीं हुई । उनसे मिलने का मन कर रहा था, सोचा आपको भी साथ ले चलू ?
मैंने भी उनकी हाँ मे हाँ मिला दी । इस तरह हम पहुंच गये डाक्टर विश्वास के पास ।

डाक्टर विश्वास, उस समय कोई व्यस्त ना थे, इसलिए मिलने में कोई परेशानी नहीँ हुई
हमें देखते ही, डाक्टर विश्वास तपाक से ब़ोले, आइये मित्रवर आइये, फिर फक्कड जी को मुखातिब हो कर कहने लगे,  फक्कड जी सब कुशल मंगल तो है? आज हमारी याद कैसे आ गई?
फक्कड जी कहने लगे, डाक्टर साहब, आज के जमाने में कुशल मंगल की बात करना तो
अच्छा लगता है, लेकिन होता नहीं है ।
क्या आंख दिखाने आऐ हैं?
फक्कड जी कहने लगे, आंख दिखाना, डराना, धमकाना ?
क्या डाक्टर साहब आप हमसे ऐसी उम्मीद करते हैं ?
वैसे डराना धमकाना न तो हमारे बस की बात है और न हमारे सोच विचार में ।
तभी डाक्टर साहब के किलीनिक में एक मरीज ने कदम रखा ।
इसके बाद डाक्टर साहब मरीज से बात करने लगे । औऱ इस तरह बातचीत में रुकावट आ गई ।
डाक्टर साहब – बताइये आपको क्या तकलीफ है ?
डाक्टर साहब – लगता है कि मेरी नजर में खोट आ गया है?
मरीज की बात सुन कर डाक्टर विश्वास चकराए, सोचने लगे,  आमतौर पर मरीज अपनी परेशानी बताता है,  जैसे कि पास की नजर कम होना या दूर की नजर कम होना या नजर का ही कम होना । लेकिन नजर में खोट ?
फिर भी डाक्टर साहब ने मरीज की पूरी नजर टैस्ट की ।
फिर डाक्टर साहब ने कहा – आपकी तो नजर पूरी तरह से ठीक है । फिर समस्या कहाँ है?
मरीज कहने लगा – जी मुझे हर चीज अच्छी दिखाई देती है । आप पेशे से डाक्टर हैं, मुझे इस पेशे में कुछ भी बुराई नहीं दिखाई देती । कुछ भी गलत नहीं दिखाई देता। जैसे

झोलाछाप डाक्टरों का , डाक्टरी करना । यानि कि, किसी भी पेशे में मुझे कोई अनफेयर प्रैक्टिस नजर नहीं आती जिसे आमतौर पर अनफेयर प्रैक्टिस माना जाता है ।
मरीज की बात सुन कर डाक्टर साहब गहरे सोच में डूब गये, फिर थोड़ी देर बाद,  मरीज से पूंछने लगे – अच्छा बताइये, आप कहाँ काम करते हैं ? आप के अपने बास के .साथ कैसे संबंध हैं? आप कितने समय से मौजूदा कंपनी में हैं ? आपकी कितने समय से तरक्की नहीं हुई है ?
इतने सारे प्रश्न एक साथ पूंछने पर मरीज घबरा कर पूछने लगा – डाक्टर साहब मुझे हुआ क्या है ?
डाक्टर विश्वास कहने लगे,  आप पहले मेरे प्रश्नों का उत्तर दीजिए फिर मैं आप को बताऊँगा कि आप को क्या हुआ है।
मरीज कहने लगा, डाक्टर साहब,  मैं एक प्राइवेट कम्पनी बतौर एक एकाउन्टैंट काम करता हूँ । पिछले छः सात साल से काम कर रहा हूँ । मैं एक सक्षम अधिकारी हूँ । लेकिन  तरक्की के मामले में जीरो हूँ । मेरे अपने बास के साथ संबंध सामान्य हैं,  पर घनिष्ठ नहीं । मेरे से जूनियरों का प्रमोशन होता रहता है, पर मैं वहीं का वहीं पडा हूँ । मेरी तरक्की नहीँ होती । अब बताइए, डाक्टर साहब मुझे क्या हुआ है?
डाक्टर विश्वास कहने लगे – देखिये, मेरे विचार से आप को  चमचेरिया हुआ है ।
चमचेरिया ? क्या यह भी कोई बीमारी है ?
डाक्टर साहब कहने लगे, हाँ यह भी एक किस्म की बीमारी है । जैसे मलेरिया होता है, लवेरिया होता है । उसी तरह से चमचेरिया होता है । यह रोग ज्यादातर कैरियर की दहलीज पर खडे व्यक्तियों को जल्दी होता है या तरह-तरह की ठोकर खाये व्यक्तियों को । लेकिन यह कोई बाल रोग नहीं है । उस समय तो व्यक्ति एक खास किस्म का होता है, उसे उस समय न पिटने का डर होता है और नहीं पीटने का । यह रोग उन व्यक्तियों को भी जल्दी होता है, जो अपने आशातीत सपनों को जल्दी से जल्दी पूरा करना चाहते हैं । इसके अलावा इस में वे व्यक्ति भी शामिल हैँ जो अपनी खद्दारी से तंग आ चुके है आप में  भी मुझे चमचेरिया के लक्षण नजर आ रह हैं
अब क्या होगा? डाक्टर साहब, मरीज ने पूँछा ।
घबराने की कोई बात नहीं,  मुझे आप का भविष्य उज्जवल नजर आ रहा है । यह रोग न तो आप क़ो शारीरिक कष्ट पहुँचाएगा और न ही मानसिक । जब खद्दारी ही नहीं बचेगी, तो चमचेरिया आप का क्या बिगाडेगा ?
तभी मैंने फक्कड जी के कान में कहा, देखो, अपने डाक्टर विश्वास हैं तो डाक्टर आँखों के और इलाज कर रहे हैं मानसिक रोग का ?
फक्कड जी ने मेरे कान में फसफुसाया, भ्रमित जी इसमें बुराई क्या है ? जब झोला छाप डाक्टर, डाक्टरी कर सकते हैं । बगैर पढे किताब की व्याख्या जा सकती है तो डाक्टर विश्वास आँखों के रोग के डाक्टर होते हुये मानसिक रोग का इलाज क्यों नहीं कर सकते? आज किसी विषय पर व्याख्यान देने के लिए उस विषय विशेष का एक्सपर्ट होना लाजिमी तो  नहीं है । क्या ऐसे विशेषज्ञ आप को ढूँढने से नहीं मिलेंगें ?
दूसरी तरफ डाक्टर विश्वास अपने मरीज क़ो समझा रहे थे कि आप अपने बास पर अपनी योग्यता एवं वफादारी की धाक कैसे जमा सकते  हैं । अच्छा बताइए, आप का अपने संग-साथियों के साथ कैसा संबंध है?
मरीज ने कहा – मैं तो अपने सभी संग-साथियों के साथ हँस कर, प्यार से बात करता हूँ

डाक्टर विश्वास कहने लगे- अगर आप अपनी सफलता की सीढियों में छलांग लगाना चाहते हैं तो कल से यह सब बंद । आप अपने सभी संग- साथियों के साथ गंभीरता से बातचीत करेंगे, वह भी टू दी पाइंट, कोई हँसी मजाक नहीं । अपने एवं अपने संग-साथियों के बीच एक उचित दूरी बनाकर रखेंगे । लंच टाइम में अपना लंच नहीं करेंगें । आगे पीछे कभी भी करिये, अच्छा तो यही रहेगा कि सुबह-शाम भोजन की आदत डालिये । लंच टाइम में  या आफिस आवर्स के बाद, बास के आफिस या चैंबर के चक्कर काटिये, स्टाफ की चुगली का कोई अवसर मत चूकिये । बात-बेबात बास से मिलने की कोशिश कीजिये और बास को यह अहसास कराने की कोशिश कीजिए कि आप बफादारी के मामले में किसी से कम नहीं हैं । हाँ आफिस में देर तक रुकने की आदत डालिये इससे आप को अपने बास से निकटता
बनाने में मदद मिलेगी । पहले-पहल हो सकता है, बास आप की उपेक्षा करे । आप निराश मत होइये, आप लगे रहिए ।
देर- सवेर में, आप पर आपके बास का विश्वास जमेगा औऱ आप की प्रगति का दरवाजा खुल कर रहेगा ।
इतनी बात सुन कर मरीज, डाक्टर साहब को मार्गदर्शन फीस की  राशि दे कर चला गया।

इसके बाद फक्कड जी ने डाक्टर साहब से उनके इस तत्व ज्ञान की सार्थकता पर प्रश्न पूछा तो डाक्टर साहब कहने लगे – मैंने जो सफलता का ज्ञान अपने मरीज को दिया है वह अपवाद से परे नहीं है ।
डाक्टर साहब की बात सुन कर, हम तो निरुत्तर हो गये । क्या आप भी ?

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