मदर्स डे
आज मदर्स डे है । हर साल 14 मई को यह दिवस दुनिया भर में मनाया
जाता है । लेकिन ये समारोह आज एक औपचारिकता मात्र नहीं रह गये हैं ?
क्या आज अपनी माँ को उसका उचित सम्मान दे पायें है जिसकी वह अधिकारी है ।
आखिर क्यों ? क्या यह सच नहीं हैं कि आज हम पारिवारिक मूल्यों के पतन के शिकार हैं ।
आज संयुक्त परिवार की जगह एकल व्यक्ति परिवार ले रहा है । बात तो इससे भी आगे बढ कर सिंगिल मदर और सिंगिल फादर का चलन भी जोरों पर है जो भविष्य में मदर्स डे और फादर्स डे की अवधारणा को ठेस पहुंचायेंगे । बच्चे मदर्स डे पर माँ को तरसेंगे और फादर्स डे पर फादर के लिये ।
अतः समय की पुकार है हम मदर्स पूरे सम्मान के साथ इस तरह से मनायें कि व्यक्तिवादी आत्मकेन्द्रित सोच पर लगाम लगायी जा सके और परिवार में माँ – बाप भाई, बहन सभी का सम्मान बना रहे ।
आज मदर्स डे है । हर साल 14 मई को यह दिवस दुनिया भर में मनाया
जाता है । लेकिन ये समारोह आज एक औपचारिकता मात्र नहीं रह गये हैं ?
क्या आज अपनी माँ को उसका उचित सम्मान दे पायें है जिसकी वह अधिकारी है ।
आखिर क्यों ? क्या यह सच नहीं हैं कि आज हम पारिवारिक मूल्यों के पतन के शिकार हैं ।
आज संयुक्त परिवार की जगह एकल व्यक्ति परिवार ले रहा है । बात तो इससे भी आगे बढ कर सिंगिल मदर और सिंगिल फादर का चलन भी जोरों पर है जो भविष्य में मदर्स डे और फादर्स डे की अवधारणा को ठेस पहुंचायेंगे । बच्चे मदर्स डे पर माँ को तरसेंगे और फादर्स डे पर फादर के लिये ।
अतः समय की पुकार है हम मदर्स पूरे सम्मान के साथ इस तरह से मनायें कि व्यक्तिवादी आत्मकेन्द्रित सोच पर लगाम लगायी जा सके और परिवार में माँ – बाप भाई, बहन सभी का सम्मान बना रहे ।
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