अक्ल बचत के फायदे
देखिये साहब, आपने अन्य अनेक किस्म की बचत योजनाओं के बारे में सुना होगा। क्या आपने कभी अक्ल बचत के बारे में सुना है ? नहीं न ? तो आइये हम आपको अपने एक मित्र फक्कड़ नाथ फक्कड से मिलवाते हैं । वह बतायेंगे आपको इसके फायदे । लीजिये सुनिये हमारी बातचीत -
फक्कड जी आपने अक्ल बचत योजना पर काम करना शुरू कर दिया है । क्या यह योजना प्रतिष्ठित मान्यता –“ ज्ञान बाँटने से ज्ञान बढता है” के विरुद्ध नहीं है?
भ्रमित जी, अगर यही एकमात्र सत्य होता तो कंसल्टेंसी बिजनेस का भविष्य? कंसल्टेंसी बिजनेस का बढता दायरा भी कुछ संकेत करता है ।
तब क्या आप यह कहना चाहते हैं ? कि यह एकमात्र सत्य नहीं है ।
सत्य तो यही है ।
अच्छा, आप बताइए आपकी अक्ल बचत योजना से आम जनमानस को क्या लाभ हैं ?
म्रमित जी आप बास नाम के जीव के बारे में तो जानते ही होंगे । यह जीव सर्वव्यापी है, यह घर आफिस सभी जगह मौजूद है । यह अकेला नहीं है । इसकी भी मल्टी लेवल चेन है । यह आवश्यक नहीं है कि जो महाशय आफिस में कड़क आफीसर हैं वह घर में भी अपनी आफीसरी प्रतिष्ठा बनाए रखें हों । यानि, कि घर में कड़क आफीसर के बजाय म्याऊँ बने हुए न होँ । अतः स्पष्ट है कि, आप का इन महान विभूतियों के बीच कार्य करना कोई हँसी खेल नहीं है । अगर आप इन विभूतियों के बीच अपनी सृजनशील बुद्धि का इस्तेमाल करेंगे तो आप पर आये दिन मुशीबत आती जाती रहेगी । इसलिए इस मामले में अक्ल बचत का फार्मूला आपकी काफी मदद कर सकता है ।
अगर आप सृजनशील नागरिक हैं और किसी निजी या सरकारी आफिस में काम करते हैं तो यह अक्ल बचत योजना आपके लिए बड़े काम की है । आप बस, अपने बास की अकल की योजना को अमलीजामा पहनाइऐ और सुखी रहिये । यानि कि बास की योजना को अपनी सृजनशील बुध्दि के बिना लागू कीजिए । आपका सृजनशील योगदान सफलता की स्थिति में आप की वाहवाही का कारण तो बनेगा लेकिन जरा सी चूक में आप पर मुशीबत का पहाड़ भी टूट पड़ेगा । अतः उचित यही है कि आप अक्ल बचत योजना को अपने जीवन में अपनाएं । जितनी योग्यता से आप इसे अपनी निजी जीवन में लागू करेंगे, यह उतनी ही तेजी से यह आपकी सफलता का राज भी बनेगी ।
अगर आप वरिष्ठ नागरिक हैं तो यह योजना आपके लिए बहुत ही काम की है । वरिष्ठ नागरिकों की, मेरे विचार में एक बड़ी समस्या अपना ज्ञान बाँटने की होती है जिसको सुनने वाला कोई नहीं होता। यह समस्या अन्य अनेक समस्याएं खडी करती रहती है। इसके अलावा ये सज्जन पूर्व में बास रहे हैं और ऊँची आवाज में बोलने के आदी हैं । बदली हुई परिस्थिति में उन्हें ऊँची आवाज में नहीं धीमी आवाज़ में बोलना है । यह स्थिति उन्हें तनाव व कुंठा की ओर ले जाती है । लेकिन वे हैं कि अपनी आदत से बाज नहीं आते । इसके अलावा उनका अकेलापन उनको काटने को दौडता है । बात बे बात उनकी हर सलाह उनको अप्रसांगिक साबित करती रहती हैं । जो उन्हें हताशा की ओर धकेलती है ।
यह योजना उनके लिए भी बड़ी लाभकारी है जो कि हाँ जी हाँ जी प्रवृत्ति के लिये जाने जाते हैं ।
लेकिन सृजनशील व्यक्तियों के लिए इस योजना का क्या लाभ है ?
देखिए भ्रमित जी यह योजना सबका साथ सबका विकास योजना का हिस्सा नहीं है ।
अच्छा, फक्कड जी आप वरिष्ठ नागरिकों के लिए इस योजना के लाभ के बारे में कुछ और बताइयेंगे ।
देखिये भ्रमित जी वरिष्ठ नागरिक पूर्व में बास थे जो अब सत्ताच्युत हो चुके हैं और घर में ही एकांत जीवन बिता रहे हैं । वे घर के संपूर्ण घटना क्रम पर नजर रखते हैं । कुछ भी गलत दिखाई देने पर अपनी राय देने से नहीं चूकते । जिसके कारण उन्हें अक्सर अपमानित तक होना पड़ता है । ऐसे अपमान से बचने में उनका मौन व्रत काफी सहायक हो सकता है । यानि कि अक्ल बचत योजना ।
क्या यह आदर्श स्थिति है ?
नहीं बिल्कुल नहीं । लेकिन यह मौजूदा समय का कठ़ोर सत्य है ।
क्या इसका कोई विकल्प नहीं ।
है क्यों नहीं । लेकिन वह खोज का विषय है । आप वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाइये और इस तरह की समस्याओं का ड़ट कर मुकाबला करें ।
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देखिये साहब, आपने अन्य अनेक किस्म की बचत योजनाओं के बारे में सुना होगा। क्या आपने कभी अक्ल बचत के बारे में सुना है ? नहीं न ? तो आइये हम आपको अपने एक मित्र फक्कड़ नाथ फक्कड से मिलवाते हैं । वह बतायेंगे आपको इसके फायदे । लीजिये सुनिये हमारी बातचीत -
फक्कड जी आपने अक्ल बचत योजना पर काम करना शुरू कर दिया है । क्या यह योजना प्रतिष्ठित मान्यता –“ ज्ञान बाँटने से ज्ञान बढता है” के विरुद्ध नहीं है?
भ्रमित जी, अगर यही एकमात्र सत्य होता तो कंसल्टेंसी बिजनेस का भविष्य? कंसल्टेंसी बिजनेस का बढता दायरा भी कुछ संकेत करता है ।
तब क्या आप यह कहना चाहते हैं ? कि यह एकमात्र सत्य नहीं है ।
सत्य तो यही है ।
अच्छा, आप बताइए आपकी अक्ल बचत योजना से आम जनमानस को क्या लाभ हैं ?
म्रमित जी आप बास नाम के जीव के बारे में तो जानते ही होंगे । यह जीव सर्वव्यापी है, यह घर आफिस सभी जगह मौजूद है । यह अकेला नहीं है । इसकी भी मल्टी लेवल चेन है । यह आवश्यक नहीं है कि जो महाशय आफिस में कड़क आफीसर हैं वह घर में भी अपनी आफीसरी प्रतिष्ठा बनाए रखें हों । यानि, कि घर में कड़क आफीसर के बजाय म्याऊँ बने हुए न होँ । अतः स्पष्ट है कि, आप का इन महान विभूतियों के बीच कार्य करना कोई हँसी खेल नहीं है । अगर आप इन विभूतियों के बीच अपनी सृजनशील बुद्धि का इस्तेमाल करेंगे तो आप पर आये दिन मुशीबत आती जाती रहेगी । इसलिए इस मामले में अक्ल बचत का फार्मूला आपकी काफी मदद कर सकता है ।
अगर आप सृजनशील नागरिक हैं और किसी निजी या सरकारी आफिस में काम करते हैं तो यह अक्ल बचत योजना आपके लिए बड़े काम की है । आप बस, अपने बास की अकल की योजना को अमलीजामा पहनाइऐ और सुखी रहिये । यानि कि बास की योजना को अपनी सृजनशील बुध्दि के बिना लागू कीजिए । आपका सृजनशील योगदान सफलता की स्थिति में आप की वाहवाही का कारण तो बनेगा लेकिन जरा सी चूक में आप पर मुशीबत का पहाड़ भी टूट पड़ेगा । अतः उचित यही है कि आप अक्ल बचत योजना को अपने जीवन में अपनाएं । जितनी योग्यता से आप इसे अपनी निजी जीवन में लागू करेंगे, यह उतनी ही तेजी से यह आपकी सफलता का राज भी बनेगी ।
अगर आप वरिष्ठ नागरिक हैं तो यह योजना आपके लिए बहुत ही काम की है । वरिष्ठ नागरिकों की, मेरे विचार में एक बड़ी समस्या अपना ज्ञान बाँटने की होती है जिसको सुनने वाला कोई नहीं होता। यह समस्या अन्य अनेक समस्याएं खडी करती रहती है। इसके अलावा ये सज्जन पूर्व में बास रहे हैं और ऊँची आवाज में बोलने के आदी हैं । बदली हुई परिस्थिति में उन्हें ऊँची आवाज में नहीं धीमी आवाज़ में बोलना है । यह स्थिति उन्हें तनाव व कुंठा की ओर ले जाती है । लेकिन वे हैं कि अपनी आदत से बाज नहीं आते । इसके अलावा उनका अकेलापन उनको काटने को दौडता है । बात बे बात उनकी हर सलाह उनको अप्रसांगिक साबित करती रहती हैं । जो उन्हें हताशा की ओर धकेलती है ।
यह योजना उनके लिए भी बड़ी लाभकारी है जो कि हाँ जी हाँ जी प्रवृत्ति के लिये जाने जाते हैं ।
लेकिन सृजनशील व्यक्तियों के लिए इस योजना का क्या लाभ है ?
देखिए भ्रमित जी यह योजना सबका साथ सबका विकास योजना का हिस्सा नहीं है ।
अच्छा, फक्कड जी आप वरिष्ठ नागरिकों के लिए इस योजना के लाभ के बारे में कुछ और बताइयेंगे ।
देखिये भ्रमित जी वरिष्ठ नागरिक पूर्व में बास थे जो अब सत्ताच्युत हो चुके हैं और घर में ही एकांत जीवन बिता रहे हैं । वे घर के संपूर्ण घटना क्रम पर नजर रखते हैं । कुछ भी गलत दिखाई देने पर अपनी राय देने से नहीं चूकते । जिसके कारण उन्हें अक्सर अपमानित तक होना पड़ता है । ऐसे अपमान से बचने में उनका मौन व्रत काफी सहायक हो सकता है । यानि कि अक्ल बचत योजना ।
क्या यह आदर्श स्थिति है ?
नहीं बिल्कुल नहीं । लेकिन यह मौजूदा समय का कठ़ोर सत्य है ।
क्या इसका कोई विकल्प नहीं ।
है क्यों नहीं । लेकिन वह खोज का विषय है । आप वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाइये और इस तरह की समस्याओं का ड़ट कर मुकाबला करें ।
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Nice Post Sir
ReplyDeleteRakesh Kumar ji thank you for your feedback.
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