Wednesday, April 1, 2020

भविष्यवाणी का सच

भविष्यवाणी का सच

 हाल ही में, मेरे पास अनेक मित्रों के मैसेज आये. जिन में बताया गया कि आज हम जिस कोरोना वायरस बीमारी का दंश झेल रहे हैं. उसकी भविष्यवाणी तो दस हजार वर्ष पूर्व कर दी गयी थी. इसका उल्लेख नारद संहिता में है. कोई व्यक्ति दस हजार वर्ष आज की मौजूदा कोरोना वायरस बीमारी की भविष्यवाणी कैसे कर सकता है. यह बात मेरी समझ से बिलकुल परे है.
जहाँ तक मैं समझ पाया हूँ. व्यक्ति की सोच, व्यक्ति के देश काल के सामजिक परिवेश की सीमाओं नहीं लांघ सकती. अगर ऐसा संभव होता, तो इतिहास में अन्य अनेक विद्वान एवं महान हस्तियां हुई है, उन सभी ने अपने समय काल की सामाजिक समस्याओं से जूझते हुए सामाजिक प्रगति में महान योगदान दिया है. लेकिन वे भी आधुनिक जगत की आवश्यकताओं के अनुरूप सोच को जन्म नहीं दे पायें है. यह काम आधुनिक काल के महान हस्तियों ने किया है.

उदाहरण के लिए देखिये, पूंजीवाद का जन्म शामंतवाद के मरणासन्न होने पर ही हुआ. जब वह सामाजिक प्रगति के साथ नहीं चल सकता था. तब ही पूंजीवादी सोच, जैसे व्यक्ति को केन्द्र बिंदु मान कर व्यक्ति के संपूर्ण विकास के लिए व्यक्ति आजादी बोलने की, लिखने की, सेक्यूलरिज़्म का सिद्धांत - राजसत्ता का काम काज धर्म निरपेक्ष कै तरीके से चलाया जायेगा. सेक्युलर स्टेट का अपना कोई धर्म नहीं होगा. वह अपने नागरिकों को जाति, भाषा, धर्म, नस्ल के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करेगा. धर्म व्यक्ति की निजी आस्था का विषय होगा और राजनीति में धर्म की कोई जगह नहीं होगी.
इस प्रकार, व्यक्ति को जाति, भाषा धर्म, तथा नस्ल के आधार पर होने वाले भेदभाव से बचाया जा सके. सत्ता का विकेन्द्रीकरण, आदि. इन्ही जीवन मूल्यों को लेकर, शामन्तवाद को तोडते हुए पूंजीवाद अस्तित्व आया था. देखिए उन्हीं जीवन मूल्यों का, आज का पूंजीवाद साम्राज्यवाद, घोर शत्रु बना बैठा है.
स्पष्ट है, समय के साथ सत्य भी बदलता है. अत: दस हजार वर्ष पूर्व की भविष्यवाणी सच नहीं हो सकती. यह कुछ निहित स्वार्थी तत्वों द्वारा भ्रामक प्रचार है. जिस का उद्देश्य सामाजिक प्रगति के बारे में आम मेहनतकश आवाम को भ्रमित करना है.
मानव सभ्यता का इतिहास गवाह है कि वह उन्नत से उन्नत स्थिति की ओर विकसित होता रहा है और होता रहेगा. इस में विलंब हो सकता है. लेकिन विकास का क्रम नहीं रुकेगा.


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